व्लादिमीर नोवोकोव ने 1955 ईस्वी में अपनी एक रचना को लोलिता के नाम से प्रकाशित कराया जो एक उपन्यास था। यह कृति बहुत लोकप्रिय हुई और कालांतर में इसे साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। इस कथानक पर आधारित पहली फिल्म 1962 में हॉलीवुड में बनी। फिल्म का नाम भी लोलिता ही रखा गया। यद्यपि लेखक तो व्लादिमीर नोवोकोव थे परंतु पटकथा लेखन में डायरेक्टर स्टेनली कुब्रिक और जेम्स बी हैरिस का योगदान था। तत्कालीन परिस्थितियों में उपन्यास के हर फ्रेम को यथावत सेल्यूलॉयड पर उकेरना व्यवहारिक नहीं था इसलिए डायरेक्टर स्टैनली ने पटकथा लेखन में बहुत सारे परिवर्तन किए ताकि विवाद खड़ा ना हो।
० हम्बर्ट),शैली विन्टर्स (चार्ल्स हेज),स्यू लियोन (लोलिता), गैरी कॉकरेल(रिचर्ड टी शिलर) ईत्यादि।
यह कहानी है एक मध्यम आयु के प्रोफेसर की जो एक 14 साल की अल्हड़ किशोरी नवयौवना के मोहपाश में बंधकर अपना काम-धंधा, सामाजिकता और नैतिक- अनैतिक का फर्क भूल चुका है। वह अपनी किशोरावस्था के पहले क्रश पड़ोसी की हमउम्र लड़की के साथ सहज आकर्षण के वशीभूत चोरी-छिपे इंटिमेट होने की अधूरी कोशिश के दौरान मन-मस्तिष्क पर ऐसी प्रभाविता का शिकार बन गया कि यह मनोविकार बनकर प्रोफेसर हम्बर्ट को आजीवन सताता रहा। लोलिता को हासिल करने के लिए प्रोफेसर पहले उसकी विधवा मां से शादी करता है और फिर कुछ समय बाद संयोगवश सड़क दुर्घटना में लोलिता की मां मिसेज चार्लोट हेज भगवान को प्यारी हो जाती है। लोलिता की मां के गुजर जाने के बाद प्रोफेसर हम्बर्ट को अपने कुत्सित इच्छापूर्ति का अवसर मिल जाता है।फिर वह रिश्ते में अपनी सौतेली बेटी के साथ अपने मनोविकारजन्य फंतासी को साकार करने में लिप्त हो जाता है।इस तरह कहानी आगे बढती है।इस आगे की कहानी में ही नयन चटोरों के लिए चटपटी विजुअल डिशेज परोसी गई है। मगर यह कहानी वास्तव में एक ट्रेजेडी है। जिसमें मुख्य पात्र प्रोफेसर हम्बर्ट( यहां हम प्रोफेसर को कहानी का नायक नहीं कह सकते क्योंकि वह सारा काम खलनायकों वाला कर रहा है) लोलिता से दुबारा मिलने के बाद जान जाता है कि लोलिता को उसके चंगुल से बचा कर ले जाने वाला कौन है। वह उस आदमी को पिस्तौल से मार डालता है। पुलिस उसे पकड़ कर जेल में डाल देती है जहां बीमार होकर वह मर जाता है और दूसरी तरफ लोलिता भी उसके बाद अपने बच्चे को जन्म देते हुए अल्लाह को प्यारी हो जाती है। मगर पूरी कहानी जानने के लिए या तो पूरा उपन्यास पढ़ना होगा (Read) अथवा लोलिता फिल्म को देखना होगा। Trailer
व्लादिमीर नोवोकोव को लोलिता के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ था। इस प्रकार लोलिता एक कालजयी विश्व प्रसिद्ध साहित्यिक धरोहर है जिसका संसार की अनेक भाषाओं में अनुवाद किया गया है । तरह तरह के विवादों के बावजूद इसकी लोकप्रियता आज भी ताजा है। कुछ लोग फिल्म लोलिता को सिर्फ इसलिए देखना चाहते हैं कि अंतरंग सेक्सी दृश्य देखने को मिलेंगे। परंतु यह फिल्म वास्तव में मानवीय संबंधों और मनोविकारों के मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने का साहित्यिक प्रयास मात्र है। यहां यह देखना दिलचस्प हो सकता है की मनुष्य का चरित्र और व्यक्तित्व किस प्रकार निर्मित होता है। परिवेश का असर आदमी को क्या से क्या बना देता है और वही आदमी दूसरों के साथ किस प्रकार व्यवहार करता है यह समझने के लिए यह फिल्म देखना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
हॉलीवुड में 1997 में फिर से लोलिता पर आधारित फिल्म बनी जिस के डायरेक्टर एड्रियन लिन और पटकथा लेखक स्टीफन चीफ थे। मारियो कैसर निर्मित इस फिल्म के मुख्य कलाकार थे जेरेमी इरोंस प्रोफेसर हंबर्ट के रूप में, मेलानिए ग्रिफिथ चार्लोट हेज के रूप में, फ्रैंक लैबजेला और डोमिनिक स्वैन लोलिता के रूप में।
इसे सबसे पहले सितंबर 1997 में रोम में रिलीज किया गया जबकि यूनाइटेड स्टेट्स में 25 सितंबर 1998 को। 2 घंटे 17 मिनट की ड्यूरेशन वाली इस फिल्म में मूल कथा के अनुरूप फिल्मांकन किया गया है एक विश्व प्रसिद्ध नोबेल प्राइज से नवाजी गई अमर कृति पर आधारित होने के बावजूद इस फिल्म का विवादों से चोली दामन का संबंध रहा है। हॉलीवुड की इस फिल्म के लिए आरंभ में यूनाइटेड स्टेट्स में कोई वितरक नहीं मिल रहा था इसलिए यूरोप में रिलीज होने के 1 साल बाद यह अमेरिका में रिलीज हुई। इससे आप दूसरे ओटीटी के अलावा गूगल प्ले मूवी पर भी देख सकते हैं। ट्रेलर देखने के लिए यहां क्लिक करें। 1962 वाली लोलिता एमएक्स प्लेयर पर फ्री में भी देख सकते हैं।



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